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Kabaddi कैसे खेले। कबड्डी खेल के नियम ,जानकारी, इतिहास

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कबड्डी कैसे खेले। कबड्डी के नियम जानकारी इतिहास

नमस्कार दोस्तों ! स्वागत है आपका Sportskeedalive ब्लॉग में| तो इस ब्लॉग पोस्ट में हम जानने वाले है Kabaddi कैसे खेले और कबड्डी के नियम ,जानकारी ,इतिहास के बारे में| ये कबड्डी खेल क्या है ? और Kabaddi खेल में कैसे ज्या सकते है ? तो इन सभी बातो को हम इस पोस्ट में विस्तारपूर्वक जानेंगे|

kabaddi खेल क्या है ?

जैसे की हमने बताया कबड्डी एक ऐसा खेल है जिसमे खिलाडी की आपने ताकद और पूरी जरुरत होती है और खिलाडी को इस खेल में आपको सभी खेल का मिश्रण देखने को मिलता है। जैसे इसमें रेसलिंग, रग्बी आदि खेलों का मिश्रण देखने मिलता है. इसका मुकाबला दो दलों के बीच होता. ये जहाँ एक तरफ बहुत ही ज़बरदस्त खेल है वहीँ दूसरी तरफ़ कई कसरतों का मेल भी है. समय के साथ इस खेल का बहुत विकास हुआ है. आज ये ज़िला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेला जा रहा है. बहुत बड़े पैमाने पर खेले जाने की वजह से कई नौजवान कबड्डी में दिलचस्पी भी लेने लगे हैं, और अपने क्षेत्र के कबड्डी क्लब से जुड़कर कबड्डी के ज़रिये अपना भविष्य और अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगे है.

कबड्डी खेल को विभिन्न जगहों में विभिन्न नाम से जाना जाता है. जैसे तमिलनाडु में कबड्डी को चादूकट्टू, बंगलादेश में हद्दू, मालद्वीप में भवतिक, पंजाब में कुड्डी, पूर्वी भारत में हू तू तू, आंध्र प्रदेश में चेडूगुडू के नाम से जाना जाता है। कबड्डी शब्द मूलतः एक तमिल शब्द ‘काई- पीडी’ शब्द से बना है जिसका मतलब है हाथ थामे रहना, तमिल शब्द से निकलने वाला शब्द कबड्डी उत्तर भारत में बहुत मशहूर है, यह खेल एक बहुत ही बढ़िया खेल माना ज्याने लगा है।

कबड्डी खेल का इतिहास (History of kabaddi game)

इस खेल का निर्माण प्राचीन भारत के तमिलनाडू राज्य में हुआ था। आधुनिक कबड्डी इसी का संशोधित रूप है, जिसे विभिन्न जगहों पर अन्य कई नामो से भी जाना जाता है. ये विश्वस्तरीय खेल सन 1936 में बर्लिन ओलिंपिक से मिली. सन 1938 में इसे कलकत्ता में राष्ट्रीय खेलों में सम्मिलित किया गया. सन 1950 में अखिल भारतीये कबड्डी फेडरेशन इंडिया (KFI) का गठन हुआ और कबड्डी खेले जाने के नियम पब्लिश किये गये. इसी फेडरेशन को ‘अमैच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ़ इंडिया’ (AKFI) के नाम से सन 1972 में पुनर्गठित किया गया. इसका प्रथम राष्ट्रीय टूर्नामेंट चेन्नई में इसी साल खेला गया था।

कबड्डी को जापान देश में भी बहुत प्रसिद्धि मिली है. वहाँ इस खेल को सुंदर राम नामक भारतीय सन 1979 में सबके सामने रखा. सुंदर राम उस समय ‘अमैच्योर कबड्डी’ के एशियाई फेडरेशन की जानिब से इस खेल को लेकर जापान देश गये थे. वहाँ उन्होंने लोगों के साथ मिल कर दो महीने तक इसका प्रचार किया. सन 1979 में इस खेल का भारत और बांग्लादेश के बीच का मुकाबला भारत में ही खेला गया. सन 1980 में इस खेल के लिए एशिया चैंपियनशिप का आग़ाज़ किया गया, जिसमे भारत ने बांग्लादेश को हरा कर इस टूर्नामेंट को जीता. इस टूर्नामेंट में इन दो देशों के अलावा नेपाल, मलेशिया और जापान भी थे. इस खेल को एशियाई खेल में सन 1990 में शामिल किया गया. इस दौरान इस खेल को बीजिंग में कई अन्य देशों के बीच मुकाबले के साथ खेला गया.

खेल की विशेषता (Specialty of kabaddi game)

ये कबड्डी खेल मुख्यता दो दलों के बीच होता है. इसमें एक दल आक्रामक और दूसरा दल परिरक्षक के रूप में होता है. आक्रामक दल से एक एक करके खिलाड़ी परिरक्षक के क्षेत्र में परिरक्षकों को हराने के लिए आते हैं. परिरक्षकों द्वारा इस एक के बाद एक आते हुए परिरक्षकों को पकड़ना होता है. इस खेल का विस्तृत वर्णन नीचे दिया गया है –

अंतर्राष्ट्रीय कबड्डी खेल (International kabaddi)

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कबड्डी के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दलों में प्रत्येक दल में 7 खिलाड़ी होते हैं. खेल का मैदान दो दलों में बराबर भागों में हिस्सेदारी होती है. पुरुषों द्वारा खेले जाने वाले कबड्डी में मैदान का क्षेत्रफल (10 बाई 13) का होता है, वहीँ स्त्रियों द्वारा खेले जाने वाले कबड्डी में मैदान का क्षेत्रफल (8 बाई 12) का होता है. दोनों दलों में तीन अतिरिक्त खिलाड़ी मौजूद होते हैं. क्युकी खिलाडी को चोट लगने पर उसके जगह दूसरा खिलाडी आ सके। ये खेल दो 20 मिनट के अंतराल पर खेला जाता है, जिसके बीच खिलाड़ियों को पांच मिनट का हाफ- टाइम मिलता है. इस हाफ टाइम के दौरान दोनों दल अपना कोर्ट बदल लेते हैं और खेल की सुरुवात एक रेड करके की ज्याति है।

  • इस खेल को खेलते हुए आक्रामक दल की तरफ़ से एक खिलाडी परिरक्षक दल के कोर्ट में ‘कबड्डी- कबड्डी’ या ‘हुतूतू‘ कहते हुए जाता है. इस दौरान जाने वाले खिलाडी को एक पॉइंट अर्जित करने के लिए एक साँस में कबड्डी-कबड्डी कहते हुए परिरक्षक दल के कोर्ट में जा कर उस दल के एक या एक से अधिक खिलाड़ियों को छु कर जल्द से जल्द अपने कोर्ट में आना होता है. यदि बिना सांस छोड़े खिलाड़ी विरोधी दल के एक या एक से अधिक खिलाडी को छू कर अपने दल के कोर्ट में पहुंच जाता है तो, उसके दल को एक पॉइंट मिलता है.
  • जाने वाले खिलाड़ी को कबड्डी-कबड्डी सिर्फ सांस छोड़ते हुए ही कहना होता है. यदि खिलाड़ी की सांस अपने कोर्ट में आने से पहले ही टूट जाती है, तो उसे आउट करार देकर रेफ़री द्वारा मैदान से बाहर कर दिया जाता है. यदि वो एक या एक से अधिक खिलाड़ी को छू कर अपने कोर्ट में बिना सांस लिए पहुँच जाता है, तो परिरक्षक दल के खिलाड़ी के छुए गये खिलाड़ी को रेफ़री आउट करार देकर मैदान से बाहर कर देता है, जिसके कारण जितने खिलाडी छूके आउट हुवे उतने आक्रामक दल को पॉइंट मिलता है.
  • इस दौरान परिरक्षक दल के खिलाड़ी मैदान के बीचों – बीच खिंची गयी रेखा को पार नहीं कर सकते. इसके साथ ही एक और रेखा खिची रहती है, जिसे अपने कोर्ट में लौटते समय यदि आक्रामक दल का खिलाड़ी छू भी लेता है और इसके बाद सांस लेने लगता है तो उसे आउट नहीं किया जाएगा.
  • आउट हुए खिलाडी अस्थायी रूप से मैदान से बाहर जाते हैं. अपने विरोधी टीम के खिलाड़ी को मैदान से बाहर भेज देने पर पॉइंट अर्जन होता है. यदि विरोधी दल पूरी तरह से मैदान से बाहर हो जाता है तो सामने वाले दल दो दो अतिरिक्त पॉइंट बोनस के तौर पर मिलते हैं. इसे ‘लोना’ कहा जाता है. खेल के अंत में जिस दल का स्कोर पॉइंट अधिक होता है वो विजेता हो जाता है.

इस खेल में होने वाले मैच खिलाडी की उम्र और उसके वजन के अनुसार विभाजित होते हैं. इस खेल के दौरान खिलाड़ियों के अतिरिक्त मैदान में 6 औपचारिक सदस्य भी मौजूद् होते हैं. इन सदस्यों मे एक रेफरी, दो अंपायर, एक स्कोरर और दो असिस्टेंट स्कोरर भी होते हैं. जो खिलाडी की अच्छी तरह से जांच करते है.

प्रो कबड्डी खेल (Pro kabaddi game)

इस Pro Kabaddi legue (PKL) भारत में एक पेशेवर कबड्डी लीग, इंडियन प्रीमियर लीग टी -20 क्रिकेट टूर्नामेंट के प्रारूप पर आधारित है। ये Pro kabaddi legue की स्तापना भारत सर्कार है जिससे कबड्डी खेल को प्राधान्य दिया जाए और इस खेल को बहुत ही ऊंचाई पर लिया जाए। इस प्रो कबड्डी लीग की स्तापना २०१४ में की गयी है। आनंद मिश्रा माशाल स्पोर्ट्स के साथ मिलकर ही इस प्रो कबड्डी लीग की स्तापना की गयी है। इस खेल का प्रसारण का अधिकार Star Sports Channel को दिया गया है। Pro Kabaddi Legue को आप Starsports.com इस वेबसाइट पर जाके Online भी देख सकते है.

प्रो कबड्डी के अब तक ३ सीजन पूर्ण हो गए है। इस प्रो कबड्डी लीग में कुल मिलकर १० कबड्डी टीम्स है जिनके नाम आपको आगे दिए है —

टीमखेलजीतहारटाई%जीत%हार%टाईश्रेष्ठ
दबंग दिल्ली1023164723.80%69.04%7.16%6
बेंगलुरू बुल्स1064851743.47%54.35%2.18%उपविजेता
जयपुर पिंक पैंथर्स1044650950.00%40.91%9.09%चैंपियन
यू मुम्बा1076863675.00%63•55%30.54%चैंपियन
बंगाल वारियर्स10543501238.63%56.82%4.55%4
तेलगू टायटन्स10445471250.00%36.36%13.64%3
पटना पाइरेट्स11162361356.86%32.33%10.42%चैंपियन
पुणेरी पलटण1064256727.27%63.63%9.10%3
कुल8351661662846.11%46.11%7.78%
टीम प्रदर्शन

Pro kabaddi Top 5 Best Players

  • सचिन तवर: गुजरात फार्च्यूनजायंट्स  Sachin Tawar: Gujarat Fortunegiants.
  • विशाल भारद्वाज: तेलुगु टाइटंस       vishal Bhardwaj: Telugu Titans.
  • नितिन रावल: जयपुर पिंक पैंथर्स     Nitin Rawal: Jaipur Pink Panthers.
  • परदीप नरवाल: पटना पाइरेट्स     Pardeep Narwal: Patna Pirates.
  • नितिन तोमर: पुनेरी पलटन            Nitin Tomar: Puneri Paltan.

कबड्डी खेल के नियम (Kabaddi game rules in hindi)

हर खेल के कुछ निया होते है वैसे ही विभिन्न तरह से खेले जाने की वजह से कबड्डी खेल के कई विभिन्न नियम हैं. इसके नियम नीचे दिए जा रहे हैं.

  • एक रेड तभी मान्य होती है, जब रेडर कम से कम एक पैर के साथ बाउल रेखा को पार करता है, जबकि दूसरा पैर हवा में होता है,अगर पाव हवा में हुवा तो ही रेड मान्य होंगी।
  • खिलाडी को दूसरे विरोदियोंके के दाल में कबड्डी कबड्डी कहकर ही ज्याना पड़ता है अगर खिलाडी कबड्डी कबड्डी बोलना बंद करे फ़ाउल मानकर खिलाडी को आउट किया ज्याता है।
  • प्रत्येक मैच 40 मिनट का होना चाहिए. इस दौरान खिलाडी विरोधी टीम के कोर्ट में ‘रेड’ करता है. रेड करने वाले खिलाडी को रेडर कहते हैं. किसी खिलाड़ी द्वारा उसके विरोधी दल के कोर्ट में प्रवेश करते ही रेड शुरू हो जाती है.
  • खिलाडी अगर करते समय लाइन के बहार ही पकड़ा जाए तो विरोदियोंके टीम को ही पॉइंट्स मिलते है और उस खिलाडी को बाद किया ज्याता है.
  • रेडर को उसके अंगों और धड़ के अलावा किसी अन्य चीज से नहीं पकड़ा जा सकता है। इसका अधिकारी खासतौर पर ध्यान रखते हैं। और रेडर किसि खिलाडी को चोट नहीं पंहुचा सकता.
  • कोई भी प्लेयर कोर्ट से बाहर नहीं जा सकते हैं। ऐसा करने से एक अंक का नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, एक खास क्षेत्र होता है, जिसे लॉबी कहा जाता है। यह तभी सक्रिय होता है, जब रेडर ने किसी विपक्षी खिलाड़ी को छुआ हो।तभी खिलाडी को पॉइंट है.
  • बिना अंक अर्जित करने वाली रेड एक बार में एक ही की जा सकती है। ऐसा लगातार दो बार करने पर आक्रमण करने वाली टीम का अगला रेड डू ऑर डाई होता है। अगर वो एक अंक हासिल करने में नाकाम रहते हैं तो विपक्षी टीम को एक अंक मिल जाता है।
  • रेडर द्वारा डिफेंडर के कोर्ट में एक बार प्रवेश कर जाने पर रेडर दो तरह से पॉइंट अर्जित कर सकता है. इसमें पहला बोनस पॉइंट और दूसरा टच पॉइंट होता है. जो टीम के लिए बहुत ज्यादा मायने रक्त है.

तकनिकी नियम (Technical rules)

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  • नॉकआउट, सेमीफाइनल या फाइनल के दौरान टैग और टच को चुनौती देने के लिए एक असफल रेफरल का मौका दिया जाता है, जो कि टीवी रीप्ले पर आधारित होता है। हालांकि, अंतिम निर्णय अंपायर द्वारा ही दिया जाता है अगर ये सफल रहा तो पॉइंट दिया ज्याता है।
  • हर टीम प्रत्येक हाफ में एक इन-प्ले कोच परामर्श की हकदार है। परामर्श का अधिकतम समय 20 सेकेंड होता है या जब तक रेड खत्म नहीं होते या जो भी पहले उसे पूरा कर लेता है।

कबड्डी खेल के कुछ पॉइंट्स (Some points of Kabaddi game)

  • बोनस पॉइंट : अगर डिफेंडर के कोर्ट में छह या फिर छह से ज्यादा खिलाडी की मौजुदी है और उसी समय रेडर बोनस लाइन तक पहुंच कर उसे पर कर ले तो रेडर को बोनस के तौर पर बोनस पॉइंट मिलता है।
  • टच पॉइंट : अगर रेडर अपने रेड दौरान किसी खिलाडी को टच करके वापस आ ज्याता है तो उसे टच पॉइंट कहा ज्याता है। रेडर ने खिलाडी को टच किया उन आउट घोषित करके बाहर भेज दिया ज्याता है।
  • टैकल पॉइंट : यदि एक या एक से अधिक डिफेंडर, रेडर को 30 सेकंड तक डिफेंड कोर्ट में ही रहने पर मजबूर कर देते हैं, तो डिफेंडिंग टीम को इसके बदले एक पॉइंट मिलता है जिसे टैकल माना ज्याता है।
  • आल आउट : अगर किसी एक टीम ने विरोधी टीम के सभी खिलाडी को आउट कर दे तो टीम को घोषित करके सामने वाली टीम को याने जीती हुई टीम को 2 बोनस पॉइंट्स मिल ज्याते है।
  • एम्प्टी रेड : अगर खिलाडी रेड के दौरान किसी भी खिलाडी या लाइन को बिना छुए वापस आ ज्याता है तो उसे रेड को एम्प्टी रेड माना ज्याता है। एम्प्टी रेड का कोई भी पॉइंट नहीं दिया ज्याता है।
  • डु और डाई : अगर किसि टीम एम्प्टी रेड हो जाए तो उस टीम को “डु और डाई” का मौका दिया ज्याता है। अगर इसके दौरान टीम बोनस पॉइंट या फिर टच पॉइंट नहीं ला सकीय तो सामने वाली टीम को बोनस पॉइंट दिया ज्याता है।
  • सुपर रेड : जिस रेड में रेडर तीन या तीन से अधिक पॉइंट अर्जित करता है, उस रेड को सुपर रेड कहा जाता है। ये तीन पॉइंट बोनस और टच को मिला कर भी हो सकता है या सिर्फ टच पॉइंट भी हो सकता है।
  • सुपर टैकल : डिफेंडर टीम में खिलाड़ियों की संख्या तीन या तीन से कम हो जाती है, और वो टीम किसी रेडर को सँभालने और आउट करने में सफ़ल हो जाती है तो इसे सुपर टैकल कहते हैं। सुपर टैकल के लिए डिफेंडर टीम को एक अतिरिक्त पॉइंट भी मिलता है। इस पॉइंट का इस्तेमाल आउट हुए खिलाडी के पुनर्जीवन के लिए नहीं किया जा सकता है।

विश्वस्तरीय कबड्डी खेल के नियम (Rules of world class kabaddi game)

कबड्डी खेल को देखा जाए तो इसके अलग नियम है जैसे प्रो कबड्डी लीग में जो लागु होते है वह विश्वस्तरीय कबड्डी खेल के लिए लागु नहीं होते तो हम अब विष्वस्तरीय कबड्डी के नियम बारेमे जानेंगे।

  • ग्रुप स्टेज के दौरान अगर कोई टीम अपने विरोधी टीम को मैच में 7 पॉइंट से अधिक कई मार्जिन से हराता है, तो जीतने वाली टीम को 5 लीग पॉइंट मिलते हैं। जबकि हारने वाली टीम को एक भी पॉइंट्स नहीं दिया जायेगा।
  • यदि विजेता टीम की जीत का मार्जिन 7 या 7 से कम पॉइंट का होता है तो जीतने वाली टीम को 5 लीग पॉइंट दिये जयते है और हारने वाली टीम को 1 लीग पॉइंट दिया ज्याता है।
  • किसी मैच के टाई हो जाने पर दोनों टीमों को 3- 3 लीग पॉइंट दिये जाते है। ग्रुप मैच के टाई के बाद कौन सी टीम सेमी फाइनल में जाएगी, इसका निर्णय एक तरह के ‘डिफरेंशियल स्कोर’ द्वारा होता है। किसी टीम के लिए ये स्कोर उसके द्वारा कुल अर्जित पॉइंट और कुल स्वीकार्य पॉइंट के अंतर से पता चलता है। अधिकतम ‘डिफरेंशियल स्कोर’ पाने वाली टीम सेमी फाइनल में जाती है क्युकी उस टीम पास पॉइंट्स ज्यादा होते है।
  • यदि डिफरेंशियल स्कोर में दो टीमों का स्कोर बराबर रहता है तो ऐसे हालात में टीमों का कुल स्कोर कितना है ये देखा जाता है।अधिकतम पॉइंट अर्जित करने वाली टीम को सेमिफिनल के लिए भेजा जाता है।

कबड्डी में गोल्डन रेड (Golden red in Kabaddi)

अगर कबड्डी में दोनों टीम के पॉइंट्स बराबर आ ज्याते है ,तो इस दौरान एक टॉस होता है, और टॉस जीतने वाले टीम को गोल्डन रेड का मौक़ा मिलता है. इस दौरान रेड लाइन को बोनस लाइन माना जाता है। दोनों दलों को एक एक बार इसका मौक़ा मिलता है। इसके बाद भी यदि टाई की ही अवस्था बनी रही, तो विजेता टॉस के ज़रिये घोषित किया जाता है।

भारतीय कबड्डी के प्रकार (Types of kabaddi game in India)

जैसा की आपको पता चला है की कबड्डी खेल बहुत प्रसिद्ध है वैसे ही कबड्डी खेल के भारत में कुछ प्रकार भी माने गए है। कबड्डी खेल के चार बहुत विख्यात प्रारूप हैं, जिसे भारत में खेला जाता है. इसे भारत के अमैच्योर कबड्डी फेडरेशन (AKFI) द्वारा आयोजित किया जाता है।

  • संजीवनी कबड्डी – इस कबड्डी में खिलाडियों के पुनर्जीवन का नियम होता है। विरोधी दल के खिलाडी को आउट करने पर आक्रामक दल से बाहर हुए खिलाड़ियों में से एक को पुनर्जीवन मिल ज्याता है और फिर वह अपने दल की तरफ से फिर से खेलने लगता है। ये खेल भी 40 मिनट का होता है। जिसे खेलने के दौरान एक पांच मिनट का हाफ टाइम मिलता है। जिसमे दो दलों में सात सात खिलाड़ी मौजूद होते है, और जो दल अपने विरोधी के सभी खिलाडियों को आउट कर देता है, उसे बोनस के तौर पर अतिरिक्त चार पॉइंट मिलते हैं।
  • जेमिनी कबड्डी : इस कबड्डी में, सात खिलाड़ी या तो खेलते हैं या बाहर रखे गए खिलाड़ी को तब तक बाहर रहना पड़ता है जब तक कि उनकी टीम के सभी सदस्य बाहर नहीं हो जाते। विरोधी पक्ष के सभी खिलाड़ियों को बाहर करने में सफल रहने वाली टीम एक बिंदु हासिल करती है। खेल तब तक जारी रहता है जब तक पांच या सात ऐसे अंक सुरक्षित नहीं हो जाते हैं और उनकी कोई निश्चित अवधि नहीं होती है।
  • अमर कबड्डी : अमर कबड्डी समय सीमा नियम में संजीवनी रूप से मिलता जुलता है। लेकिन, जिस खिलाड़ी को बाहर घोषित किया जाता है, वह अदालत से बाहर नहीं निकलता है, बल्कि अंदर ही रहता है, और खेल साथ चलता है। विपक्ष के प्रत्येक खिलाड़ी के लिए, आउट, ‘एक टीम एक बिंदु अर्जित करती है।
  • पंजाबी कबड्डी : पंजाबी कबड्डी 22 मीटर के व्यास की गोलाकार पिच पर खेली जाती है।

Conclusion – आपको यह Kabaddi कैसे खेले। कबड्डी खेल के नियम ,जानकारी, इतिहास सबधित पोस्ट कैसा लगा| निचे कमेंट करके अपनी राय जरुर दे| साथ ही इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे और कुछ प्रॉब्लम आये तो हमे संपर्क करना न भूले| ताकि आपके दोस्त भी इसके बारे में जान सके|

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