भारत की सवश्रेष्ठ महिला खेळाडू || Top Indian Sports Women

Indian Sports Women के बारेमे बताने जा रहे है। इंडिया खेल के क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा आगे बढ़ चूका है। इंडिया में सिर्फ लड़के ही खेल के मामले में आगे नहीं है बल्कि India में बहुत सारी Sports Women भी है, जो  खेल के मामले में लड़को से कुछ कम नहीं है। आज हम इन्ही Indian Sports Women के बारेमे पूरी जानकारी बताएँगे।

हम सभी खेल के बारेमे बहुत कुछ जानते है। लेकिन ऐसे बहुत सरे लोग है जिन्हे सिर्फ indian sports men के बारेमे ही पता होता है,  लोगो को indian sports women के बारेमे बहुत ही कम पता होता है। कुछ लोगो को तो sports में women भी है, ये भी पता नहीं होंगा। ज्यादातर india की sports women को ज्यादा प्रसिद्धि नहीं मिली है। और sports women ज्यादा चर्चे में भी नहीं है। लेकिन आप चिंता मत करे आज हम इन्ही कुछ best indian sports women के बारेमे बताने जा रहे है।

 

ऐसी बहुत सारी indian sports women है जिन्होंने ज्यादातर शतरंज, बैडमिंटन, टेनिस जैसे खेलो में महारथ हाशिल किया है।  लेकिन अब बहुत सारि women है जो की कुश्ती, तीरंदाजी, जिम्नास्टिक, स्क्वैश और क्रिकेट और हॉकी के क्षेत्र में हैं। और उन्होंने बहुत ही ज्यादा नाम किया है। लेकिन इन Sports women के बारेमे न जानना यह बहुत बुरी बात है। तो अगर आपको indian sports women के बारेमे जानना है तो पोस्ट को पूरा पड़ना चाहिए।

Top 5 sports women in India (इंडिया की टॉप १५ खेल महिलाए)

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1. Sania Mirza (Tennis player)

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सानिया मिर्ज़ा का जन्म १५ नवंबर १९८६ को मुंबई में हुवा था। सानिया मिर्ज़ा टेनिस के क्षेत्र में बहुत ही बड़ा महारथ हाशिल कर चुकी है। सानिया मिर्ज़ा भारत की professional tennis player मानी जाती है। वह पुरे विश्व में १ नंबर की best tennis player मानी ज्याती है। उन्होंने अपने करियर में छह ग्रैंड स्लैम बुक के रिकॉर्ड भी हाशिल किये हुवे है।

 

२००३ से लेकर २०१३ तक उन्हें indian no. 1 tennis player माना गया था। अपनी सफल मेहनत और अपने करियर से सानिया को सबसे अच्छी indian sports women  है और वह sports करियर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली लिस्ट में पहले नंबर पर आती है। वह भारत की सबसे अच्छी महिला खिलाड़ी है। और वह २००७ में विश्व में २७ वि रैंक पर थी। उन्होंने अपने करियर में बहुत सरे टेनिस मैचेस खेले है ,और लगभग सभी मैचेस में जित भी हाशिल की है।

उन्होंने भारत देश के लिए टेनिस के क्षेत्र में बहुत सारे मुकाम हाशिल किये है। लेकिन उन्हें अपनी कलाई पर चोट लगने के कारन टेनिस के करियर को छोड़ना पड़ा। और अपने मुलभुत जीवन की तरफ ध्यान लगाना पड़ा। इसके आलावा उन्होंने करीब १ मिलियन से ज्यादा की कमाई की है।

 

इसके अलावा, वह ओपन एरा में एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट में गोल करने और जीतने के लिए तीसरी Indian Sports women हैं, और दूसरे सप्ताह तक पहुंचने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने तीन प्रमुख बहु-खेल स्पर्धाओं, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और एफ्रो-एशियाई खेलों में कुल 14 पदक (6 gold medal) जीते हैं।

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टेनिस करियर

सानिया मिर्ज़ा की टेनिस करियर की शुरुवात की बात करे तो उनका करियर २००१ को शुरू हुवा था। जब सानिया मिर्ज़ा ६ साल की थी तभी उनकी टेनिस की करियर की शुरुवात हो गयी थी। और जा वह ITF Circuit में आई तो उनकी उम्र १५ साल की थी। जबकि वह २००१ से २००३ तक Junior ITF सर्किट में थी। उन्हें वह पर बहुत बड़ा सक्सेस मिला है। मिर्ज़ा ने हैदराबाद में 2003 के एफ्रो-एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक (Four Gold Medal) जीते।

तभी से सानिया मिर्ज़ा ने पीछे पूछे मुड़कर नहीं देखा। फिर २००४ में सानिया हैदराबाद के एक मैच में ३ बार हार गयी। लेकिन उन्होंने उपनि उम्मीद नहीं छोड़ी फिर उन्होंने उसी मैच में अप्पन पहला WTA डबल्स का खिताब जीता। फिर उन्होंने बहुत सारे मेडल्स और ख़िताब प्राप्त किये। २००५ में भी उनका करियर बहुत ज्यादा सफल रहा , उन्हें WTA नेवसोमेयर ऑफ़ ईयर के नाम से घोषित किया गया। 

२००६ से २००७ में तो सानिया ने पुरे ३० रिकार्ड्स को तोड़ दिया। फिर २००८ और २००९ में उन्होंने Grand Slam mixed-doubles championship को भी जित लिया था। फिर उन्हें २०१० और २०११ में कुछ हेल्थ की प्र्ब्लेम हो गयी। तभ भी उन्होंने अपने गेम को नहीं छोड़ा उन्होंने और मेहनत की और २०१३ में खेल मि फिरसे वापसी की। जब वह २०१३ से २०१४ के बिच में खेल रही थी तो उन्होंने फिर ५ रिकॉर्ड ब्रेक कर दिए थे। 

२०१५ से २०१६ की बात की जाये तो वह विश्व की नंबर १ टेनिस प्लेयर बन गयी थी। इतनी सर्जरी कठिनिया होते हुवे भी मिर्ज़ा ने खेलना नहीं बंद किया इसीलिए उन्हें Best indian Sports women कहा ज्याता है। 

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2. karnam malleswari (weightlifter)

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कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून १९७५ को अंदर प्रदेश के एक छोटेसे वूसवनिपेटा नाम के गांव में हुवा था। वह एक सेवानिवृत्त भारतीय वेटलिफ्टर हैं। उन्होंने (first indian woman to win gold medal in olympics) ओलम्पिक में भारत के लिए पहला गोल्ड मैडल जित लिया था। जो की एक बहुत ही बढ़ी बात थी। उन्हें best indan sports women kaha ज्याता है।

उन्हें १९९५ में राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड से सन्मानित किया गया। भारत का सर्वोच्च खेल और उन्हें १९९९ में नागरिक पद्मश्री से भी सन्मानित किया गया था। उन्हें भारत की first indian woman to win gold medal in olympics माना ज्याता है।

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करियर 

मल्लेश्वरी के करियर के बारेमे बात की जाये तो उन्होंने  १९९४ और 1995 में 54 किग्रा डिवीजन में विश्व खिताब जीता और 1993 और 1996 में तीसरा स्थान हासिल किया।1994 में, उसने इस्तांबुल में विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और 1995 में उसने 54 किलोग्राम वर्ग में कोरिया में एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप  जीती। उन्होने उस वर्ष चीन में विश्व चैंपियनशिप में 113 किलोग्राम की रिकॉर्ड लिफ्ट के साथ खिताब जीता था।

 

अपनी ओलंपिक जीत से पहले भी, मल्लेश्वरी 29 बार अंतरराष्ट्रीय पदक के साथ दो बार की भारोत्तोलन विश्व चैंपियन थी, जिसमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदकों के साथ, मल्लेश्वरी को 1999 में राजीव गांधी खेल रत्न, 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1999 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया।

 

2000 के सिडनी ओलंपिक में, मल्लेश्वरी ने “स्नैच” में 110 किग्रा और कुल 240 किग्रा के लिए “क्लीन एंड जर्क” श्रेणियों में 130 किग्रा भार उठाया। उन्होंने कांस्य पदक जीता और ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वह ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली और एकमात्र भारतीय महिला वेटलिफ्टर (best indian sports women) भी हैं।

3. Mary kom (Boxer)

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मंगते चुंगनेइजैंग मैरी कॉम का जन्म 1 मार्च १९८३ को इंडिया के मणिपुर राज्य के एक छोटे गाओं में हुवा था। वह एक भारतीय ओलंपिक बॉक्सर है।और संसद सदस्य, राज्य सभा की सदस्य हैं। वह छह बार रिकॉर्ड के लिए विश्व एमेच्योर मुक्केबाजी चैंपियन बनने वाली एकमात्र महिला मुक्केबाज हैं, जिन्होंने पहली सात विश्व चैंपियनशिप में से प्रत्येक में पदक जीता है, और आठ विश्व चैम्पियनशिप जीतने वाली एकमात्र मुक्केबाज (पुरुष या महिला) हैं।

 

वह २०१२ के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाली एकमात्र महिला है। मुक्केबाज मैरीकॉम, फ्लाईवेट (५१ किलोग्राम) वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने और कांस्य पदक जीतने वाली indian sports women हैं। उन्हें नंबर 1 एआईबीए विश्व महिला रैंकिंग लाइट फ्लाईवेट श्रेणी में भी स्थान दिया गया था।

 

वह 2014 में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक पाने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ (first indian boxer sports women) बनीं, और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली (indian sports women) भारतीय महिला मुक्केबाज़ हैं। वह छह बार रिकॉर्ड के लिए एशियाई एमेच्योर मुक्केबाजी चैंपियन बनने वाली एकमात्र मुक्केबाज भी हैं।

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करियर

अपनी शादी के बाद, मैरी कॉम ने मुक्केबाजी से एक छोटा अंतराल लिया। उसके और ऑन्ग्लर के पहले दो बच्चे होने के बाद, कोम ने फिर से प्रशिक्षण शुरू किया।  उसने 2008 में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में रजत पदक और चीन में AIBA महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में लगातार चौथा स्वर्ण पदक जीता था। जिसके बाद वियतनाम में 2009 एशियाई इंडोर खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

 

2010 में, कोम ने कजाकिस्तान में एशियाई महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। और बारबाडोस में एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में उनका लगातार पांचवां स्वर्ण पदक था। एआईबीए ने 46 किग्रा वर्ग का उपयोग बंद कर दिया था, उसके बाद उसने 48 किग्रा भार वर्ग में बारबाडोस में प्रतिस्पर्धा की।

 

2010 के एशियाई खेलों में, उसने 51 किग्रा वर्ग में भाग लिया और कांस्य पदक जीता। 2011 में, उन्होंने चीन में एशियाई महिला कप में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।वह best indian sports women भी मानी ज्याति है जो भारत के लिए सबसे गर्व की बात है।

 

3 अक्टूबर 2010 को, उन्होंने संजय और हर्षित जैन के साथ, 2010 के दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए स्टेडियम में चलाए गए अपने उद्घाटन समारोह में रानी के बैटन को प्रभावित करने का सम्मान प्राप्त किया। हालांकि, उसने प्रतिस्पर्धा नहीं की, क्योंकि राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की मुक्केबाजी को शामिल नहीं किया गया था।

4. p v sindhu (Badminton player)

p. v. sindhu sportskeedalive
p. v. sindhu (badminton player)

पुसरला वेंकट सिंधु जन्म 5 जुलाई १९९५ आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुवा था।  एक भारतीय पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी (indian badminton players female) हैं। 2009 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने के बाद, वह करियर की उच्च रैंकिंग में पहुंच गई। 2 अप्रैल 2017 में अपने करियर के दौरान, पुसरला ने ओलंपिक सहित कई टूर्नामेंट और 2019 विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित बीडब्ल्यूएफ सर्किट पर पदक जीते हैं। वह बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली पहली indian sports women हैं।

 

पुसरला ने 17 साल की उम्र में सितंबर 2012 में BWF वर्ल्ड रैंकिंग के शीर्ष 20 में प्रवेश किया। 2013 में शुरू, पुसरला ने 2015 के अपवाद के साथ, हर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता। वह जांग निंग के बाद विश्व चैम्पियनशिप में पांच या अधिक पदक जीतने वाली सिर्फ दूसरी महिला हैं। पुसरला ने 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जो एक फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए। स्पेन की कैरोलिना मारिन से हारने के बाद उसने रजत पदक जीता।

 

यूएस $ 8.5 मिलियन और $ 5.5 मिलियन की कमाई के साथ, पुसरला ने फोर्ब्स की 2018 और 2019 में उच्चतम-भुगतान वाली महिला एथलीटों (Highest-paid female athletes) की सूची में पहले नंबर पर है। खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न, और भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री के प्राप्तकर्ता हैं। उन्हें जनवरी 2020 में भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।

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करियर 

 सिंधु की करियर की बात की जाये तो उनका करियर बहुत ही बड़ा और बहुत ही रोमांचिक रहा है। तो सिंधु ने अपने करियर की शुरुवात २००९ से की थी। जब वह १४ साल की थी तभ उन्होंने अपने करियर की शुरुवात कर दी थी।

 

२०१२ में वह करीब १६ साल की उम्र की हो गयी थी। जब वह १६ साल की उम्र की हुवी तो वह क्वालीफाई कर चुकी थी। फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने गेम में दयँ केंद्रित किया और बहुत आगे बढ़ती गयी। अब वह best indian woman athlete और best indian sports women भी मानी ज्याति है जो भारत के लिए सबसे गर्व की बात है।

5. Geeta phogat (wrestling)

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महिला पहलवान
की बात आ जाये तो फोगट परिवार इस खेल में सबसे आगे माना ज्याता है। उसी परिवार से गीता फोगट भी है।

 

गीता फोगट का जन्म 15 दिसंबर १९८८ हरियाणा के बिलाली गांव में हुवा था। वह एक फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। जिन्होंने 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों में कुश्ती में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता था। वह पहली (firtst indian wresteling sports women) भारतीय महिला पहलवान भी हैं, जिन्होंने ओलंपिक ग्रीष्मकालीन खेलों के लिए क्वालीफाई किया था।

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करियर

अगर गीता की करियर की बात की जाये तो २००९ में पंजाब के जलंदर में  Commonwealth Wrestling चैंपियनशिप में पहला गोल्ड मैडल (First gold medal) हाशिल किया था।

 

फिर २०१० में उन्होंने में भी एक गोल्ड मैडल हाशिल किया जो नई दिल्ली में था। २०१२ के समर में ओलम्पिक पदक भी हाशिल किये। फिर २०१२ में विश्व व्रेस्टलिंग चैंपियनशिप में ब्रोंज मैडल हाशिल किया।अब २०१२ के एशियाई व्रेस्टलिंग चैंपियनशिप में एक जापानी व्रेस्टलेर से वह हर गयी थी। फिर २०१३ में उन्हें उसी गेम में सिल्वर मैडल से सन्मानित किया गया था।best indian wrestling sports women मानी ज्याति है जो भारत के लिए सबसे गर्व की बात है।

6. Deepika kumari (archery)

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दीपिका कुमारी का जन्म 13 जून १९९४ झारखंड राज्य में रांची में हुवा था। वह एक भारतीय एथलीट है। जो तीरंदाजी की स्थिति में प्रतिस्पर्धा करती है, वर्तमान में विश्व नंबर 9 पर है, और यह एक पूर्व विश्व नंबर एक है। उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने डोला बनर्जी और बॉम्बेला देवी के साथ महिला टीम रिकर्व इवेंट में भी इसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। best indian sports women भी मानी ज्याति है जो भारत के लिए सबसे गर्व की बात है।

 

कुमारी ने लंदन में 2012 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, जहां उन्होंने महिला व्यक्तिगत और महिला टीम स्पर्धाओं में भाग लिया, जो बाद में आठवें स्थान पर रही। उन्हें वर्ष 2012 में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा अर्जुन पुरस्कार, भारत का दूसरा सर्वोच्च खेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। फरवरी 2014 में, उन्हें फिक्की स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने उन्हें 2016 में पद्म श्री के नागरिक सम्मान से सम्मानित किया।

करियर

करियर की बात करे तो 2005 में दीपिका ने पहली सफलता हासिल की जब उन्होंने अर्जुन तीरंदाजी अकादमी में प्रवेश किया। जो कि राज्य के मुख्यमंत्री श्री की पत्नी मीरा मुंडा द्वारा स्थापित एक संस्थान था। खरसावां में अर्जुन मुंडा लेकिन उनकी पेशेवर तीरंदाजी की यात्रा वर्ष 2006 में शुरू हुई जब वह जमशेदपुर में टाटा तीरंदाजी अकादमी में शामिल हुईं।

 

यह था कि उसने दोनों उचित उपकरणों के साथ-साथ वर्दी के साथ अपना प्रशिक्षण शुरू किया। उसे वजीफे के रूप में 500 रुपये भी मिले। नवंबर 2009 में कैडेट विश्व चैम्पियनशिप का खिताब जीतने के बाद दीपिका अपने पहले तीन साल में एक बार घर लौटीं। best indian archery sports women मानी ज्याति है जो भारत के लिए सबसे गर्व की बात है।

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Conclusion : Sportskeedalive.com पर, हम ईमानदारी और काम के लिए प्रयास करते हैं। अगर आपको किसी ऐसी चीज़ के बारे में चिंता है जो इस लेख में Top indian sports women के बारे में सही नहीं लगता है, तो कृपया हमसे संपर्क करने में संकोच न करें।

 

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