बैडमिंटन के नियम, जानकारी, इतिहास Full Information Of Badminton in Hindi

आज हम badminton खेल की जानकारी Hindi में जानेंगे ब्लॉग को पूरा पढ़िए। बैडमिंटन यह एक बहुत अच्छा और पुअरना खेल माना जाता है। इस खेल में आप अपनी शारारिक  क्ष्यमता दिखा सकते है। यह खेल पुरे विश्व में खेला जाता है। यह खेल भारत में भी बहुत ही  लोकप्रिय खेल माना जाता है।

 

भारत में इस खेल में बहुत मान्यता है। सायना नेहवाल का नाम सुनते ही आपको बैडमिंटन खेल की याद आ जाएगी। क्युकी सायना नेहवाल ने बैडमिंटन में बहुत बड़ा महारत हाशिल किया है। और भारत का नाम उच्चा किया है। और भी पि व्ही सिंधी ई. है की जिन्होंने इस खेल में भारत के लिए मैडल लाया है। तो हम बैडमिंटन के बारेमे पूरी जनकारी जानेंगे।

 

बैडमिंटन यह खेल ओलम्पिक मैचेस में भी खेला जाता हे। इस खेल को इंटरनॅशनल खेल मन जाता है। अभी हम बैडमिंटन के नियम, इतिहास, बैडमिंटन कैसे खेला जाता, और बैडमिंटन को खेलने की सामग्री की बारेमे पूरी जानकारी जानेंगे।

badmintion in hindi
Badminton in hindi

 

History of Badminton (बैडमिंटन का  इतिहास)

बैडमिंटन यह खेल बहुत ही आधुनिक खेल है। जो की अंग्रेजो के ज़माने का खेल माना जाता है। यह खेल १९ वि शताब्दी में इंग्रजो के बिच शटलकॉक और बैटलोडर के भींच में शुरू हुवा। यह बहुत ही पुराण नाम है।  जो की ग्लूस्टरशायर के ड्यूक ऑफ ब्यूफोर्ट के बैडमिंटन हाउस से निकला है। जब १८६० की शुरुवात हुई तो लंदन के एक खिलौना बेचने वाले ने बैडमिंटन – एक न्यू गेम नाम की एक किताब प्रकाशित की थी। अभी वो कताब नहीं है।

 

बैडमिंटन खेल पहले बैट और बॉल से खेला जाता था। जो की ब्रिटिश सरकार की राज्य में खेला जाता था। जब यह गेम पहली बार ब्रिटिश में परस्पर खेला गया तो गेंद हवा में गयी थी और फिर लोगो ने इस गेम को बहुत ही पसंद किया।

 

पहले ये खेल फोकस्टीन में एक क्लब में खेला जाता था। जो की १ से ४ लोगो की बच में खेला जाता था। फिर लोगो ने इस खेल को पूरी अचे से जाना और दो – चार लोगो के बिच में खेलना चालू किया। पहले इस खेल में खुश भी नियम नहीं माने जाते थे। इस गेम को सीधे ही खेला जाता था। गेम में नेट तो थी मगर नेट की गहराई कितनी होती यह किसी को भी मालूम नहीं होता था। लोग आपने ही नियम के साथ गेम को खेला करते थे।

फिर भारत के पुणे में इस गेम को १८८७ में कुछ नियम लागु करके इस गेम को खेला गया।  फिर १८९० में बैडमिंटन की क्लब की स्तापना की गयी। और खेल को एक  रूप मिल गया। फिर १८९३ में बैडमिंटन असोसिएशन ऑफ़ इंग्लैंड ने नए नियमो को प्रकाशित किया। और १९०० की टाइम में इस खेल की ओलम्पिक गेम के लिए खेला गया। जो की इंग्लैंड और नेथरलैंड के बिच में खेला गया था।

इस खेल को भारत में १९३४ में शुरुवात हुई।  और फिर बैडमिंटन को १९३४ में भारत में सहयोगी शामिल कर दिया। फिर जापान, चीन, इंग्लैंड, नेथरलैंड, बहुत सारे देशो ने अपने नए खिलाडी बनाने शुरू कर दिए और इस खेल की एक अच्छी सी शुरुवात हो गयी। और यह खेल बहुत ही प्रसिद्द हो गया और बहुत ही ऊपर छा गया।
badminton in hindi में आपको आगे बहुत कुछ दिया गया है अच्छे से पढ़े।

 

Badminton Information In Hindi (बैडमिंटन की जानकारी )

badmintion in hindi
Badminton in hindi

बैडमिंटन के बारेमे आज हम हिंदी में जान ने जा। यह खेल चार लोगो के बीच में खेला जाता है। इस खेल को खेलने के लिए बैट और शटलकॉक और बॉल का भी इस्तमाल करते है। इस खेल को खेलने के लिए एक बैडमिटन कोर्ट का भी इस्तमाल करते है। और नेट का भी इस्तमाल करते है।

 

पहले कोर्ट और नेट को अच्छे ले लगाया जाता है। फिर एक साइड में दो लोग और दूसरे साइड में दो लोग हाथ में बैट पकड़ कर खड़े हो जाते है। और एक अंपायर भी होता है जो की पॉइंट्स की गिनती करता है। दोनों प्लेयर्स अपनी अपनी साइड में खेलना सुरु करदेते है। फिर मैच की शुरुवात हो जाती है। यात खेल बॉल से भी खेला जाता है और शटलकॉक से भी खेला जाता है। फिर जिसके पॉण्टस ज्यादा ह जाते है उसको विजेता घोषित किया जाता है।

 

बैडमिंटन इस गेम में खेलने के लिए बहुत सरे नियम होते है। उन सभी नियमो का पालन करना पड़ता है। और गेम को खेला जाता है।

 

Badminton Equipment List (बैडमिंटन उपकरण सूची)

बैडमिंटन में किन उपकरण का इस्तमाल करते है। badminton in hindi इसकी पूर्ण जानकारी आपको दी गयी है।

 

Badminton net

badminton in hindi
badminton net
 

बैडमिंटन खेलने के लिए नेट का भी उपयोग किया ज्याता है।  नेट मतबल दो खम्बो को खड़ा करके उसपे बंधी जाती है। नेट को कोर्ट के बिच में खड़ा किया ज्याता है।  जो की बहुट ही महत्व्यपूर्ण मन ज्याता है। नेट साधारण नायलॉन से बनायीं जाती है। नेट  रस्सी और कपडे का उपयोग किया जयते है।  नेट के बहुत सरे छेद होते है ताकि प्लेयर एक दूसरे को अच्छे से देख सके।

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Badminton court

badmintion in hindi
badminton court

 

Badminton in Hindi इस पोस्ट में हमने बैडमिंटन कोर्ट के बारेंमे पूरा बताया है। बैडमिंटन खेलने के लिए कोर्ट की बहुत इस्तेमाल किया जाता है। बैडमिंटन का कोर्ट आयात कर साइज में होता है। बैडमिंटन कोर्ट को चिन्ह से संकित किया जाता है।  इस कोर्ट को सभी तरफ हिन्ह होते है जो की प्लेयर की स्तिति के बारेमे दर्शाते है। और बहुत साडी लाइन भी होती है जो की फील्डर को सर्विस कहा से लगाए और फील्डर को कहा खड़ा रहे ये दर्शित करती है।

कोर्ट की सीसे की बात की जाए तो, कोर्ट की जो चौड़ाई होती है वो ६.१ मीटर याने २० फिट तक की है। और  एक बाजु में ये चौरई थोड़ी कम हो जाती है जो की ५.१८ मतलब १७ फिट तक होती है। लम्बाई की बात करे तो कोर्ट की लम्बाई १३.४ मीटर याने ४० फिट की होती है। सर्विस कोर्ट को नेट से 1.98 मीटर (6 फीट 6 इंच) की दूरी पर एक शॉर्ट सर्विस लाइन द्वारा दर्शित किया और बाहरी ओर और पीछे की सीमाओं से कोर्ट की चौड़ाई को विभाजित करते हुए एक सेंटर लाइन द्वारा चिह्नित किया जाता है। डबल्स में, सर्विस कोर्ट को लंबी सर्विस लाइन द्वारा भी चिह्नित किया जाता है, जो कि बैक बाउंड्री से 0.76 मीटर (2 फीट 6 इंच) है।

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Badminton racquets

badmintion in hindi
Badminton Racquets

बैडमिंटन खेलने के लिए रैकेट की बहुत ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। रैकेट के बिना ये खेल खेला नहीं जा सकता है। बैडमिंटन रैकेट बहुत ही हलके रहते है। क्युकी किसी भी प्लेयर को अच्छे से खेला जा सके। अगर रैकेट की वजन को देखा जाये तो वह ६०-७५ ग्राम के बिच में ही रहता है।

 

रैकेट यात प्लास्टिक फायबर से बना जाता है , रैकेट को बनाने में बहुत सर दतु की सामग्री इस्तेमाल की जाती है। रैकेट की जो तार होती है वह अल्लुमिनियम धातु की मिश्रण करके बनायीं जाती है। रैकेट में बहुत सारे ननोमाटेरिअल्स भी जोड़े जाते है ताकि वो स्तिर रह सके। बाजार में बहुत सारे अच्छे कंपनी के रैकेट उपलब्ध है।

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Badminton strings

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Badminton Strings
बैडमिंटन स्ट्रिंग्स की बात की जाए तो यह बहुत ही काम की चीज है जो की बात में होती है। बैडमिंटन स्ट्रिंग्स यह बहुत ही पतले होते है। अगर स्ट्रिंग्स की साइज मोटी हो तो वह साधारण 0.६२ से ०.७९ के बिच में राखी जाती है। खिलाड़ी स्ट्रिंगका तनाव काम करते  तनाव अच्छा हो तो अछि तरह से खेल सकते है। yonex की जो स्ट्रिंग है वो अच्छी होती है। तो बहुत सरे खिलाडी yonex कंपनी की बैट को ज्यादा पसंद करते है।

Badminton racquets grip

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Badminton Racquets Grip
बैडमिंटन की ग्रिप कितना महत्वपूर्ण है ये आपको Badminton in Hindi यहाँ पर बताया गया है| बैडमिंटन की ग्रिप की बात करे तो ग्रिप बहुत ही अच्छी होनी चाहिए। ग्रिप अच्छी हो तो खिलाडी की रैकेट पर अच्छा हाथ बैठ जाता है ,और रैकेट हाथ से फिसल जाने के चांस बहुत ही काम होते है। ग्रिप को पंप या टुब से लिया ज्याता है। अगर ग्रिप मोटि हो तो प्लेयर को हैंडल करने में आसानी हो जाती है। और वो अच्छे से खेल सकता है।
ग्रिप्स में एक चिपकने वाला बैकिंग होता है, जबकि ओवरग्रिप्स में टेप की शुरुआत में केवल चिपकने वाला एक छोटा पैच होता है और इसे तनाव के तहत लगाया जाना चाहिए; ओवरग्रिप उन खिलाड़ियों के लिए अधिक सुविधाजनक है जो अक्सर ग्रिप को बदलते हैं, क्योंकि अंतर्निहित सामग्री को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें अधिक तेजी से हटाया जा सकता है।

Badminton shuttlecock

badmintion in hindi
Badminton shuttlecock
शटलकॉक कितना महत्वपूर्ण है ये आपको Badminton in Hindi यहाँ पर बताया गया है। शटलकॉक सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। शटलकॉक यह एक शंकाकार टाइप में होता है। बहुत सरे लोग इसे बर्डि भी कहते है। शटलकॉक यह फाइबर से और प्लास्टिक से बनाया जाता है। जो की बहुत ही हल्का रहता है। शटलकॉक को नायलॉन से भी बनाया जाता है। शटलकॉक puma, yonex etc . कंपनी में बनाया जाता है।

Badminton shoe

badmintion in hindi
Badminton shoe

बैडमिंटन के जूते यह साधारण जूते की तरह नहीं होते।  यह बहुत ही नरम होते है और हलके भी होते है। बैडमिंटन के जूते रबर से बनाये जाते है। जो की प्लेयर की पैरो को अच्छी तरह दे फिट हो जाते है। यह जुटे गुरुत्वाकर्षण को कम करने में प्लेयर की मदत करते है। प्लेयर को जूतों की मदत से अच्छे से खेल सकते है। उन्हें कुछ भी परेशनी नहीं होती है। यह रबर के होने के कारन प्लेयर की पैरो की भी रक्ष्या करते है। प्लेयर को पैरो को चोट लगने से बचते है।

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(बैडमिंटन के नियम ) badminton rules in hindi

badminton rules in hindi के बारेमे बात करे तो बैडमिंटन के नियम बहुत ही सख्त होते है जो की प्लेयर को अच्छे से फॉलो करना पड़ते है।
  1.  खेल को शुरू करने से पहले ही टॉस किया जयते है। जिस खिलाडी की टीम टॉस जिक जाती है उसे सर्विस करने का मौका मिलता है। और जो टॉस लो जित नहीं पाता है उसे सर्विस का सामना करना पड़ता है।
  2. जब सर्वर का काम सुरु होता है, तो खिलाडी को शार्ट सर्विस से गुजरना पड़ता है। सर्वर और रिसीवर को अदालतोए बिच में ही रहना पड़ता है।
  3. सिवाय इसके कि बैडमिंटन में सर्व शटलक रैकेट के हिट होने के तुरंत बाद कोर्ट की सतह से 1.15 मीटर नीचे होना चाहिए, शटलकॉक को उछालने की अनुमति नहीं है और बैडमिंटन में, खिलाड़ी टेनिस के विपरीत, उनकी सेवा अदालतों के अंदर खड़े हो जाओ।
  4. इस गेम में २१ पॉइंट्स तक की स्कोरिंग की जाती है।  जो भी प्लेयर को ज्यादा पॉइंट्स मिलते है  घोषित कर दिया ज्याता है।
  5. खिलाडी सर्विस दये और बाये साइड से कर सकता है।
  6. अगर खिलाडी शटलकॉक को लाइन के बाहर फेक देता है तो उसे पॉइंट माना ज्याता है।
  7. खिलाडी ने अगर लाइन से बाहर कदम रखा तो दूसरे खिलाडी को पॉइंट्स दिया जायेगा।
  8. अगर नेट को शूटलकॉक लगकर गिर ज्याता है तो पॉइंट दिया जायेगा।
  9. अगर मैच में सामान पॉइंट्स मिलेंगे तो मैच प्लेयर को एक एक चांस देकर विजेता घोषित किया जायेगा|
  10. अगर २१ पॉइंट्स से ज्यादा पॉइंट्स हुवे   तो मैच २९ पॉइंट्स तक जायेगा और गोल्डन पॉइंट्स भी  दिया जायेगा।

बैडमिंटन के बारे में 8 तथ्य जो आपके दिमाग को उड़ा देंगे :-

बैडमिंटन आधिकारिक रूप से दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला खेल है, जिसमें त्वरित सजगता और शानदार कंडीशनिंग की आवश्यकता होती है। अदालत के चारों ओर घूमा हुआ शटल 300 किमी / घंटे से अधिक गति से यात्रा करता है। यहां बैडमिंटन के बारे में 8 तथ्य दिए गए हैं जो आपके दिमाग को उड़ा देंगे!

1. बैडमिंटन टेनिस की तुलना में बहुत अधिक गहन है

1985 की ऑल इंग्लैंड (टेनिस) चैंपियनशिप में, बोरिस बेकर ने केविन कुरेन को 6-3, 6-7, 7-6, 6-4 से हराया।

कनाडा के कैलगरी में 1985 विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में, चीन के हान जियान ने डेनमार्क के मोर्टन फ्रॉस्ट को 14-18, 15-10, 15-8 से हराया। निम्नलिखित उन मैचों की एक सांख्यिकीय तुलना है।

समय: टेनिस – 3 घंटे और 18 मिनट; बैडमिंटन – 1 घंटा 16 मिनट

बॉल / शटल इन प्ले: टेनिस – 18 मिनट; बैडमिंटन – 37 मिनट

मैच की तीव्रता *: टेनिस – 9 प्रतिशत; बैडमिंटन – 48 प्रतिशत

रैलियाँ: टेनिस – 299; बैडमिंटन – 146

शॉट्स: टेनिस – 1,004; बैडमिंटन – 1,972

शॉट्स प्रति रैली: टेनिस – 3.4; बैडमिंटन – 13.5

ध्यान दें कि बैडमिंटन खिलाड़ियों ने आधे समय तक प्रतिस्पर्धा की, फिर भी दो बार भागे और लगभग दो बार कई शॉट्स मारे!

* वास्तविक समय गेंद / शटल उड़ान में था, जो मैच की लंबाई से विभाजित था।

2. खेल का एशियाई वर्चस्व

1992 में ओलंपिक में शामिल होने के बाद से, एशियाई खिलाड़ियों ने 103 ओलंपिक पदक में से 93 में शानदार जीत दर्ज की है।

दुनिया में सबसे सफल बैडमिंटन देश चीन और इंडोनेशिया हैं, जिन्होंने अपने बीच सभी बीडब्ल्यूएफ घटनाओं में से 70% जीते हैं।

पुरुषों की विश्व टीम चैंपियनशिप थॉमस कप 1948 में शुरू होने के बाद से केवल तीन देशों द्वारा जीती गई है – मलेशिया, इंडोनेशिया और चीन।

उबेर कप, महिला विश्व टीम चैंपियनशिप, एशिया के बाहर, केवल 1957, 1960 और 1963 में यूएसए द्वारा जीता गया था; अन्य धारक चीन, इंडोनेशिया, जापान और हाल ही में दक्षिण कोरिया हैं।

. बैडमिंटन दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है
यह दावा किया गया है कि बैडमिंटन फुटबॉल के बाद केवल दुनिया में दूसरा सबसे लोकप्रिय भागीदारी खेल है।

1992 में जब पहली बार बैडमिंटन को ओलंपिक में शामिल किया गया था, तब 1.1 बिलियन लोगों ने टेलीविज़न पर बैडमिंटन प्रतियोगिता देखी थी।

4. एक बैडमिंटन मैच एक बार सिर्फ 6 मिनट तक चला
अब तक का सबसे छोटा बैडमिंटन मैच हांगकांग में 1996 के उबेर कप में हुआ था, जो छह मिनट तक चला था! रा क्यूंग-मिन (दक्षिण कोरिया) ने उस मैच में जूलिया मान (इंग्लैंड) को 11-2, 11-1 से हराया।

दूसरी ओर सबसे लंबा मैच 124 मिनट तक चला, और पीटर रासमुसेन (डेनमार्क) और सन जून (चीन) के बीच मुकाबला हुआ। रासमुसेन ने वह मुकाबला 16-17, 18-13, 15-10 से जीता।

5. एक शटल एक हंस के बाएं पंख से बनाया गया है
औसत शटलकॉक का वजन 4.74 से 5.5 ग्राम के बीच होता है, जिनमें से सबसे अच्छा एक हंस के बाएं पंख के पंख से बना होता है।

एक शटल के निर्माण में 16 पंखों का उपयोग किया जाता है। शीर्ष स्तर के मैच के दौरान 10 शटल का उपयोग किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक को लगभग 400 बार हिट किया जाता है

6. बैडमिंटन रैकेट के तार बिल्लियों के पेट से बने होते हैं
जबकि कुछ वर्षों में, अधिकांश खिलाड़ियों ने सिंथेटिक स्ट्रिंग्स का उपयोग करना शुरू कर दिया है, कुछ खिलाड़ी अभी भी बिल्लियों या गायों जैसे जानवरों के सूखे पेट के अस्तर से बने हिम्मत का उपयोग करते हैं।

7. बैडमिंटन शुरू में खिलाड़ियों के पैरों से खेला जाता था
टि ज़ियान जी नामक एक खेल को मूल रूप से चीनी ने खेला था, जो बैडमिंटन का अग्रदूत है। इस खेल में, खिलाड़ियों ने शटलकॉक को मारने के लिए रैकेट के बजाय अपने पैरों का इस्तेमाल किया! खेल अभी भी चीन में खेला जाता है!

8. भारत ने खेल की खोज में अपनी भूमिका निभाई
भारत में, इस खेल का अस्तित्व 1500 ई.पू. से पहले था। और “पूना” कहा जाता था। अपने मूल क्षेत्र के कारण इसे “पूना” नाम दिया गया था, जो शहर “पुणे” था। यह कहा जाता है कि “पूना” का अर्थ है “पुणे शहर का खेल”।

प्रारंभ में हथेली को रैकेट के रूप में इस्तेमाल करते हुए खेल को हाथ से खेला जाता था। बाद में, हाथों को पैरों से बदल दिया गया, कुछ ऐसा जिसने इस खेल को भारतीय पुरुषों के बीच लोकप्रिय बना दिया लेकिन भारतीय महिलाओं के लिए यह बेहद मुश्किल था। इस प्रकार, यह पुरुषों और महिलाओं के खेल में अलग हो गया था।

1870 में, भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारी अपने साथ देश वापस खेल पूना ले आए। ड्यूक ऑफ ब्यूफोर्ट, बैडमिंटन के पिता, खेल के एक महान समर्थक थे, जो वह अक्सर खेला करते थे। हालांकि, यह खेल अंग्रेजी समाज के अभिजात वर्ग के लिए काफी आदिम था। इस प्रकार, वह ग्लूचेस्टर के बैडमिंटन गांव में अपने विला में अपने दोस्तों और अपनी बेटियों के साथ पूना के खेल के महिला संस्करण को खेलना पसंद करते थे।

एक दिन, जब वह अपने विला के बगीचे में खेल रहा था, बारिश होने लगी। बिना किसी हिचकिचाहट के, उन्होंने अपने भोजन कक्ष को खाली कर दिया ताकि खेल को जारी रखा जा सके। यह बैडमिंटन के रूप में जाने जाने वाले खेल की शुरुआत भी थी

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